क्या पुलिस हथकड़ी लगा सकती है?

अभी हाल फिलहाल की ही बात है, जमशेदपुर के भाजपा नेता अभय सिंह की गिरफ्तारी के बाद वहाँ के एक अधिवक्ता चंदन चौबे , ज्ञापन देने SSP के ऑफिस पहुँचे। वहां पुलिस ने सभी लोगो को हिरासत में ले लिया। इसके बाद मंगलवार को पुलिस ने अधिवक्ता चंदन चौबे समेत आठ लोगों को जेल भेज दिया. कोर्ट में पेशी के दौरान पुलिस ने अधिवक्ता को हथकड़ी पहनाई थी. इसके विरोध में दूसरे अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और उपायुक्त से मामले की लिखित शिकायत की. बाद में हथकड़ी लगाने वाले कांस्‍टेबल को सस्‍पेंड कर दिया.
इस मामले से सवाल उठता है कि किसी आरोपी को हथकड़ी लगाने के नियम क्‍यों हैं? किस तरह के मामले में आरोपियों को हथकड़ी लगाई जा सकती है? हथकड़ी लगाने का कानून क्‍या है? पुलिस को हथकड़ी लगाने का अधिकार कब मिलता है? किन हालात में पुलिस आरोपी को हथकड़ी लगा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट अपने कई फैसलों में पुलिस द्वारा आरोपी को हथकड़ी लगाए जाने को असंवैधानिक करार दे चुका है।
CR.P.C 1973 की धारा-46 में व्यक्ति को गिरफ्तार कैसे किया जाए ये बताया गया है। इसमें कहा गया है कि पुलिस अधिकारी गिरफ्तारी के दौरान तब तक आरोपी को नहीं छुएगा, जब तक वह व्‍यक्ति बोलकर या शारीरिक प्रतिक्रिया के जरिये खुद को कस्‍टडी में ना सौंप दे। अगर कोई व्‍यक्ति बल प्रयोग कर गिरफ्तारी का प्रतिरोध कर रहा हो तो पुलिस को उसे गिरफ्तार करने के लिए हर तरह के जरूरी साधन का इस्‍तेमाल करने की छूट रहती है.
पन्धी खान नंदी खान बनाम एम्परर, 1948 क्रिमिनल लॉ जर्नल 178. नामक वाद में कहा गया की यदि कोई व्यक्ति वचन से और अपने कर्म से गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी को अपने समर्पण का एहसास करा देता है और उसके साथ चल पढ़ने को तत्पर हो जाता है तो उसे हथकड़ी आदि लगाने की आवश्यकता नहीं है।
सीआरपीसी 1976 की धारा 46 में स्त्रियों को गिरफ्तार करने के विषय में भी बताया गया है इसमें कहा गया है कि जहां किसी स्त्री को गिरफ्तार किया जाना है वहां जब तक परिस्थितियां प्रतिकूल ना हो गिरफ्तारी की मौखिक सूचना पर अभिरक्षा में उसके समर्पण की उप धारणा की जाएगी तथा जब तक परिस्थितियां अन्यथा अपेक्षा ना करें अथवा जब तक पुलिस अधिकारी महिला ना हो तब तक पुलिस अधिकारी स्त्री की गिरफ्तारी करने के लिए उसके शरीर का स्पर्श नहीं करेगा।

सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन (1978) 4 S.C.C 494
वाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा पुलिस किसी भी व्यक्ति को असीमित शक्ति का उपयोग करते हुए भी हथकड़ी नहीं लगा सकती यदि युक्ति युक्त कारण है कि वह भाग जाएगा या बल प्रयोग करके लोग शांति भंग कर सकता है तब पुलिस हथकड़ी लगा सकती है बिना किसी ठोस कारण के हथकड़ी लगाना उसके मूल अधिकार का हनन होगा।
सीआरपीसी की धारा 49 में अनावश्यक अवरोध ना करने के विषय में कहा गया है ।
इसमें साफ तौर से कहा गया है की व्यक्ति को सिर्फ उतना ही अवरोधित करना चाहिए जितने से वह भाग ना सके यदि वह स्वेच्छा से पुलिस के साथ आता है तब ऐसे में हथकड़ी या पैरों में बेड़ी नहीं लगानी चाहिए यदि ऐसा करना पड़े तो न्यायालय की अनुमति लेनी चाहिए।
निष्कर्ष-
सामान्य भाषा मे कहा जाए तो पुलिस किसी भी व्यक्ति को हथकड़ी लगाने का अधिकार तब तक नहीं रखती जब तक उसके पास हथकड़ी लगाने का कोई ठोस कारण न हो।
यदि हथकड़ी लगाने की जरूरत पड़ भी जाए तो पहले पुलिस को न्यायालय से अनुमति लेनी होगी उसके बाद ही किसी व्यक्ति को हथकड़ी लगा सकती है।

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